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अनुक्रमणिका

संपादकीयमहेश सिंह  
साक्षात्कार 
ख़्वाबों की दुनिया मुकम्मल कहाँ है (डॉ. सागर से डॉ. मोबिन जहोरोद्दीन द्वारा लिया गया साक्षात्कार)  डॉ. मोबिन जहोरोद्दीन
जेएनयू की यादें 
सागर की कहानी: दिल की ज़ुबानीडी. एन. यादव
जेएनयू का ‘सागर’ आज मुम्बई का महासागर है  डॉ. ज्योतिमय बाग
रचनाकर्म पर कुछ विचार 
‘बम्बई में का बा ?’ एक गीत में सम्पूर्ण महाकाव्यराकेश कबीर
प्रवासियों की पीड़ा का मर्म समझने वाले डॉ. सागरउर्वशी गहलोत
डॉ. सागर सार्वभौमिक संवेदना के कवि व गीतकार हैं…मनोरमा
डॉ. सागर : एक सफल और प्रतिभावान गीतकारआशीष उपाध्याय
जतसार की धुन से निकला एक गीतकारडॉ. वंदना भारती
‘मुंबई में का बा’ का स्त्री-पाठडॉ. कंचन भारद्वाज
भोजपुरी भाषा की मिठास के पैरोकारमधु सिंह
डॉ. सागर की कविताओं और गीतों में यथार्थ चेतना एवं लोक दृष्टिडॉ. शिप्रा श्रीवास्तव ’सागर’
लोक रंग के विलक्षण गीतकार डॉ. सागरडॉ. अमरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव
संवेदनाओं के आईने हैं डॉ. सागर के गीतडॉ. पूनम सिंह
डॉक्टर सागर के गीतों में भोजपुरी परिवेशकुसुम पांडेय
‘बंबई में का बा’ सदी की भीषण त्रासदी को बयां करता गीतबृजेश प्रसाद
बम्बई में का बा ? …त बम्बई में डॉ. सागर बा  मनिषा खटाटे
डॉ. सागर की रचनाएँ