वर्तमान अंक

रचनाएँ ऑनलाइन पढ़ने के लिए क्लिक करें

सूचना :

अंक 26 ‘अप्रैल-जून 2022’ के लिए रचनाएँ आमंत्रित हैं

वर्तमान अंक

अंक 25 (अक्टूबर-दिसंबर 2021) ‘समकालीन कविता : नई आमद’ विशेषांक का फुल पीडीऍफ़ डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए फोटो पर क्लिक करें.

पीडीऍफ़ डाउनलोड करने के लिए फोटो पर क्लिक करें.

अनुक्रमणिका

 सम्पादकीय
सुविधाभोगी युग एवं साहित्य का दायित्व/डॉ. अनुज कुमार
समकालीन कविता : एक विहंगावलोकन
समकालीन हिन्दी कविता और आदिवासी विमर्श/डॉ. रश्मि रवींद्रन
 इक्कीसवीं सदी की नव-वामपंथी कविताओं पर समकालीन विमर्श का प्रभाव/षैजू के
कोरोनाकाल की हिंदी कविता और भारतीय मजदूरों के दर्द की अनकही दास्तां/पवन कुमार रावत
समकालीन कविता : नई आमद
सुशोभित की कविताओं में पर्यावरण चिंतन/अमन ऋषि साहू
अदनान कफ़ील दरवेश के कविता संग्रह ‘क़िबला और अन्य कविताएँ’ में  चित्रित विविध पहलू समाज, संस्कृति और पर्यावरण/नेहा शर्मा  
इश्क में नदी : जिंदगी के मुख़्तलिफ़ रंगों का कोलाज़ है/प्रो.मुश्ताक़ अली
विजय राही की कविताएँ वर्तमान के साथ अंतःक्रिया करती हैं/आलोक रंजन
आद्य नायिका : दीदारगंज की यक्षिणी से दुर्लभ संवाद/कमलानंद झा
पूर्वोत्तर का युवा आदिवासी स्वर : तारो सिन्दिक/पुनीता जैन
सुरजीत पातर की कविताओं में बदलते नैतिक मूल्य एवं सत्ता पर व्यंग्य/डॉ. सुरजीत सिंह वरवाल
शैलेन्द्र कुमार शुक्ल के काव्य में संवेदना एवं यथार्थ/सोनिया
व्योमेश शुक्ल की कविताओं में समकालीनता का स्वर/दीपक कुमार
समय की ठनक को थाहते कवि बलभद्र/शैलेन्द्र कुमार शुक्ल
अनुज लगुन की कविता और आदिवासी अस्मिता का प्रश्न/सरिता
आदिवासी स्त्री के सशक्तीकरण की प्रतिष्ठा करता  ‘बाघ और सुगना मुंडा की बेटी’/डॉ. कुमारी उर्वशी
अवनीश त्रिपाठी के नवगीत संग्रह ‘दिन कटे हैं धूप चुनते’ का समीक्षात्मक अध्ययन/डॉ. नितिन सेठी
विवेक निराला के पद : परम्परा में आधुनिकता का विद्रोही स्वर/डॉ. जीतेन्द्र विसारिया
समकालीन कविता  : स्त्री स्वर
स्त्री का समय और सच: जितेन्द्र श्रीवास्तव और उनका काव्य-संग्रह ‘स्त्रियाँ कहीं भी बचा लेती हैं पुरुषों को’/मेहनाज़ बेगम
अनुज लुगुन की कविताओं के संदर्भ में आदिवासी स्त्री प्रतिरोध/शहिदुल इस्लाम खान
हिंदी कविता के मानचित्र पर अनामिका की स्त्री वेदना का मुखर राग/डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव ’सागर’
कुसुम अंसल की कविता संग्रह ‘समय की निरंतरता’ में स्त्री संवेदना/डॉ. रश्मि मालगी
तन के भूगोल से परे स्त्री का वृतांत : निर्मला पुतुल की कविताएं/कार्तिक राय        
समकालीन कविता : दलित स्वर
समाज को दिशा देती हिंदी दलित कवयित्रियों की काव्ययात्रा/रमन कुमार
ओमप्रकाश वाल्मीकि की कविताओं में दलित चेतना ‘बस्स ! बहुत हो चुका’ के विशेष संदर्भ में/डॉ.संध्या.एस
ओमप्रकाश  वाल्मीकि  की कविताओं  में  दलित  प्रतिरोध/  डॉ. श्रीजिना. पी. पी
हिंदी कविता : अन्य पक्ष
काव्यालोचन और उसकी परंपरा पर एक सम्यक् दृष्टि/पुनीता जैन
स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता का परिदृश्य, स्वरूप और विकास/मोहन कुमार
अदम गोंडवी के साहित्य में: राजनीतिक चेतना/डॉ. कुसुम संतोष विश्वकर्मा