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अंक-35, जुलाई-सितम्बर 2024 (दलित स्त्रीवाद विशेषांक) प्रकाशित कर दिया गया है.
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अनुक्रमणिका
| संपादकीय | |
| दलित स्त्रीवाद : तिहरी बेड़ियों के विरुद्ध संघर्ष और अस्मिता की हुँकार | डॉ. जयराम कुमार पासवान |
| विरासत | |
| विद्यादान | सावित्रीबाई फुले |
| हिन्दू नारी का उत्थान और पतन | डॉ. भीमराव अम्बेडकर |
| दलित स्त्री का दिक् काल | |
| सावित्रीबाई फुले के गद्य में सामाजिक चिंतन | डॉ. रजनी बाला अनुरागी |
| दलित स्त्री विमर्श की जड़ों की पहचान | शेखर पवार |
| दलित कविता में स्त्री स्वर की दस्तक | कंवल भारती |
| मिथक और स्त्री आंदोलन का अगला चरण | संजीव चंदन |
| दलित स्त्री आंदोलन : उत्त्पत्ति एवं विकास | रेखा यादव |
| स्त्री मुक्ति के सवाल पर डॉ. अम्बेडकर का दृष्टिकोण | अंकित कुमार सरोज |
| 1857 की क्रान्ति में दलित वीरांगना रणबीरी वाल्मीकि का योगदान | डॉ. नरेन्द्र वाल्मीकि |
| लोक आस्था में दलित स्त्री संघर्ष की देवी-लोना चमारी | अचल पुलस्तेय |
| दलित स्त्री मुक्ति की वैचारिकी | |
| दलित स्त्री-मुक्ति की सैद्धांतिकी | रजत रानी मीनू |
| दलित और दलित विमर्श की अवधारणा | सूर्यनारायण रणसुभे |
| दलित, स्त्रीवाद : अवधारणा, सामाजिक दशा-दिशा, संघर्ष और चुनौतियाँ | हीरालाल राजस्थानी |
| दलित स्त्री विमर्श पर वैचारिकी | पुष्पा विवेक |
| दलित स्त्री विमर्श की अवधारणा एवं स्वरूप | रमा नवले |
| दलित स्त्रीवाद अर्थात् स्त्री के संघर्ष, स्वप्न और नवीन विचार | डॉ. जमुना सुखाम |
| दलित स्त्री की त्रासदी : वर्तमान और भविष्य | |
| महिलाओं के ज्वलंत सवाल अभी शेष हैं | मोहनदास नैमिशराय |
| उपेक्षा और दुर्दशा का दंश झेलती ‘मदर इंडिया’ | जयप्रकाश कर्दम |
| समता की ओर समाज : स्त्री अध्ययन का वर्तमान | बजरंग बिहारी तिवारी |
| किसान महिलाओं को विशेष अवसर दिये जायें | नूतन मालवी |
| पितृसत्ता में स्त्री | रामस्वरूप किसान |
| मनुष्य के रूप में अस्तित्व की तलाश करता दलित स्त्री लेखन | डॉ. सविता |
| स्त्री मुक्ति के अधूरे प्रश्न | डॉ. पूजा रानी |
| अम्बेडकरवादी उपान से स्त्रीवाद की उड़ान | कैप्टन नीलम इंगले-लोबो |
| साहित्य में दलित स्त्री की दस्तक | |
| दलित साहित्य और नारी | डॉ. एन. सिंह |
| 21वीं सदी में दलित स्त्री-लेखन और दलित स्त्री जीवन | रजनी दिसोदिया |
| साहित्य में दलित स्त्री विमर्श की दस्तक | डॉ. प्रियंका सोनकर |
| हिन्दी साहित्य में स्त्री, दलितवादी विचारात्मक विश्लेषण | डॉ. दीपा कनौजिया |
| 21वीं सदी और स्त्री अस्मिता का प्रश्न | डॉ. मनोरमा गौतम |
| दलित स्त्रियों की काव्य संवेदना | |
| स्त्री चेतना के संवाहक दलित स्त्री काव्य संग्रह | डॉ. सुशीला टाकभौरे |
| दलित कविता में स्त्री चेतना | डॉ. सी.बी. भारती |
| दलित स्त्री संदर्भ की कविताएँ : दलित स्त्री प्रश्न | विजय कुमार भारती |
| दलित कविताएँ दर्द का दस्तावेज हैं | प्रो. कालीचरण स्नेही |
| संध्या रंगारी : मराठी दलित कविता का प्रतिरोधी स्वर | डॉ. कर्मानंद आर्य |
| भोजपुरी कविता में स्त्री स्वर | डॉ. संतोष पटेल |
| रजनी तिलक का काव्य और उनका जीवन संघर्ष | रमन कुमार |
| रजनी तिलक और दलित स्त्री एक प्रश्न : विवेचनात्मक अध्ययन | आकाश भारद्वाज |
| दलित आत्मकथाओं में दलित स्त्रियों का जीवन दर्शन | |
| हिंदी दलित आत्मकथाओं का स्त्रीवादी पाठ : गहरे पैठे अर्थों में अस्मिता की तलाश | डॉ. वंदना |
| हिन्दी की मौलिक दलित स्त्री आत्मकथाएँ | डॉ. मुसाफिर बैठा |
| दोहरा अभिशाप : स्त्री अस्मिता का संदर्भ | डॉ. प्रतिमा प्रसाद |
| हिंदी दलित स्त्रियों की आत्मकथाओं का दलित स्त्री अस्मिता में योगदान | उर्मिला यादव |
| दोहरा अभिशाप : दलित स्त्री के दोनों गालों पर थप्पड़ | डॉ. रजनी रजक |
| क्षितिज तलाशती स्त्री का स्वकथन | पुनीता जैन |
| दलित आत्मकथा और अनुवाद | डॉ. अनुराधा पाण्डेय |
| दलित स्त्री आत्मकथा में दलित स्त्री का संघर्ष : टूटे पंखों से परवाज़ तक | आकांक्षा |
| बेड़ियों से शिखर तक (कावेरी जी की आत्मकथा ‘टुकड़ा-टुकड़ा जीवन’ भाग-1 के संदर्भ में) | अजय चौधरी |
| आकांक्षा और अवसर के बीच: स्त्री संघर्ष | डॉ. आशीष कुमार ‘दीपांकर’ |
| टूटे पंखों से परवाज़ तक : समालोचनात्मक अध्ययन | डॉ. प्रदीप कुमार |
| दलित कहानियों में दलित स्त्री चेतना | |
| हिंदी कहानियों में दलित स्त्री की छवियाँ | डॉ. सुमित्रा महरोल |
| घुसपैठिए कहानी संग्रह की कहानियों में स्त्री पक्ष | डॉ. पूनम तुषामड़ |
| ओमप्रकाश वाल्मीकि की कहानियाँ : स्त्री प्रतिरोध की सशक्त आवाज | डॉ. नीलम |
| दलित कहानी के भाषिक एवं चेतनागत संदर्भ | रानी कुमारी |
| संजीव की कहानियों में दलित स्त्री-विमर्श | डॉ. मीनाक्षी चौधरी |
| दलित स्त्रियों की लोमहर्षक त्रासदी (कुसुम मेघवाल और अनिता भारती की कहानियों के विशेष संदर्भ में) | डॉ. शशि कुमार शर्मा |
| दग्ध हृदय की वाणी यानी दलित कहानी | तेजप्रताप कुमार तेजस्वी |
| संवेदनाओं और विचारों की क्रांति : ‘वर्जिन’ का साहित्यिक विश्लेषण | डॉ. अमल सिंह ‘भिक्षुक’ |
| उपन्यासों में दलित स्त्री का स्थान | |
| तपस्वी : एक नारी प्रधान उपन्यास | डॉ. राजकुमारी |
| साँप उपन्यास का स्त्रीवादी पाठ | डॉ. सुनीता |
| डॉ. शरद पगारे के उपन्यासों में दलित स्त्री (‘उजाले की तलाश’ के विशेष सन्दर्भ में ) | प्रियंका कुमारी |
| खंजन नयन उपन्यास में दिव्यांग दलित महिला की व्यथा-कथा | वंदना सिंह |
| प्रेमचंद के साहित्य में दलित स्त्री | |
| प्रेमचंद की स्त्री-दृष्टि | वीरेंद्र यादव |
| प्रेमचंद के कहानी संसार में दलित स्त्री | डॉ. किरण कुमारी |
| प्रेमचंद और दलित-स्त्री | शोभित द्विवेदी |
| घासवाली : दलित स्त्री के जीवन संघर्ष के संदर्भ में एक नवीन दृष्टिकोण | डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव ‘सागर’ |
| ‘शूद्र’ कहानी में चित्रित दलित स्त्री के स्वरूप का मूल्यांकन | अमित यादव |
| मीडिया और सिनेमा का दलित स्त्री पाठ | |
| पत्रकारिता में मूलनिवासी महिलाएँ | रूपचंद गौतम |
| परदे के आगे-पीछे एफ़्रो-अमेरिकन | विजय शर्मा |
| भारतीय सिनेमा में दलित-स्त्री | प्रो. जय कौशल |
| 21वीं सदी के हिंदी सिनेमा में दलित स्त्री | डॉ. महेश सिंह |
| रंगमंच में दलित स्त्री की उपस्थिति | |
| मंच पर दलित स्त्री संवाद | राजेश कुमार |
| देशी नाट्य परम्परा और आदिवासी-दलित संदर्भ | प्रो. ए. अच्युतन |
| साक्षात्कार | |
| दलित स्त्रियाँ हर स्तर पर जाति के खिलाफ लड़ने के लिए व्याकुल हैं | उर्मिला पवार से डॉ. प्रवीण बसंती की बातचीत |
| दलित स्त्रीवाद एक समग्र विचारधारा है | अनिता भारती से डॉ. जयराम कुमार पासवान की बातचीत |
| दलित लेखिकाएँ पति के खिलाफ़ भी बोलें और वर्ण-व्यवस्था के खिलाफ़ भी बोलें | शरण कुमार लिंबाले से सुरेश कुमार की बातचीत |
| स्त्रियों की उन्नति, उन्नयन एवं उत्थान का उर्जावान दीपस्तंभ हैं बौद्ध दर्शन | प्रो. दामोदर मोरे से डॉ. मुंजाजी इंगोले की बातचीत |
| पुस्तक समीक्षा | |
| संवेदना की मर्म स्पर्शी अनुभूति ’कथारंग’ एक दृष्टि | प्रो. अनिता वर्मा |
